सौवर्णासनसंस्थितांत्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीं हेमाभांगरुचिं शशांकमुकुटां सच्चम्पकस्त्रग्युताम् | हस्तैर्मुद्गरपाश वज्ररसनाःसंबिभ्रतीं भूषणैर्व्याप्तांगी बगलामुखीं त्रिजगतां संस्तम्भिनींचिन्तयेत् || स… more →
साधना विचारNikhilashish wrote 11 months ago: सौवर्णासनसंस्थितांत्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीं हेमाभांगरुचिं शशांकमुकुटां सच्चम्पकस्त्रग्युताम् | हस … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: विश्वव्यापकवारिमध्यविलसच्छ्वेताम्बुजन्मस्थितां कर्त्रीँखड्गकपालनीलनलिनै राजत्करां नीलभां | कांचीकुण् … more →
Nikhilashish wrote 11 months ago: अपने साधनात्मक जीवन के प्रारंभ में गुरु साधना के उपरांत मेरे द्वारा सफलतापूर्वक की गई प्रथम साधना मा … more →
Nikhilashish wrote 12 months ago: सद्यश्छिन्नशिरः कृपाणमभयं हस्तैर्वरंबिभ्रतीँ घोरास्यां शिरसांस्त्रजासुरुचिरामुन्मुक्तकेशावलिम || स्र … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मुक्ति 1. भोर की लालिमा मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो … more →