शम्मे मजार थी न कोई सोगवार था, तुम जिस पे रो रहे थे वो किसका मजार था, तडपूंगा उम्र भर दिल-ऐ-मरहूम के लिए, कमबख्त नामुराद लड़कपन का यार था, जादू है या तिलिस्म तुम्हारी जुबान में, तुम झूट कह रहे थे मुझे… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: शम्मे मजार थी न कोई सोगवार था, तुम जिस पे रो रहे थे वो किसका मजार था, तडपूंगा उम्र भर दिल-ऐ-मरहूम के … more →