Shubhashish Pandey wrote 8 months ago: कमबख्त! अजीब खेल है ये इश्क और दीवानगी का, चैन उम्मीद करते हैं खुद को कांटे चुभोने के बाद, क्या चला … more →
Shubhashish Pandey wrote 10 months ago: शिक्षक दिवस के अवसर पर ये चार पंक्तियाँ गुरुजनों को समर्पित … ज्ञान से ज्यादा मूल्यवान क्या है … more →
Shubhashish Pandey wrote 10 months ago: 1) अक्सर कुछ उदास हो एक मोड़ पे आ ठहरता है, जाने कौन सा रिश्ता है ये .. ना बनता है ना बिखरता है ! 2) … more →
Shubhashish Pandey wrote 11 months ago: दर्द कितना हो पर आंखे आसूवों को रोने नहीं देतीं मेरी बेखुदी मेरे इश्क की खबर तेरी यादों को भी नहीं ह … more →
Shubhashish Pandey wrote 11 months ago: चाह के भी जिससे कोई राज छुपाया नहीं जाता है कभी हँसाता कभी रुलाता पर हर पल साथ निभाता है खून का तो न … more →
Shubhashish Pandey wrote 11 months ago: दिल में दर्द दबाने की आँखों में नमी छुपाने की हर कोशिश कर के हार गए हम तेरी याद भूलाने की तेरी चाहत … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया दिल को तन्हाई तो आँखों को समंदर दिया इबादत-ए-इश्क में जिस … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: ऐसा नहीं की अब सब कुछ बदल गया पर हाँ हमने खुद को जरुर बदल डाला है कुछ हासिल नहीं होता छटपटाने से सो … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: “अरे इतनी सी बात पे परेशान होने की क्या जरुरत ये लो तुम मेरी फाइल दिखा देना,हाँ मेरी राइटिंग थ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: दर्द सीने में सिसकता रहा है रात भर, यादों का सिलसिला चलता रहा है रात भर, एक बार फिर से माफ़ कर दूं उ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: समझ नहीं आता की क्या कर डालूँ मैं तुम्हें बदलने की कोशिश करूं या खुद को बदल डालूँ मैं अब और यही दर्द … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: जीने के लिये इस दुनिया में कुछ खास नही रह जाता है सब कुछ होता है फिर भी कुछ पास नही रह जाता है खुद अ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: जब गम तेरा देख के दिल मुझसे नही सम्भलता है तो तेरी खुशियों की खातिर ये यूं ही दिन रात जलता है ऐसे तो … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: यौवन के मद में अनियंत्रित, सागर में खो जाने को आज चला था पैसो से मैं यौवन का सुख पाने को दिल की धड़ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: धोखे से लूट ले जा सकते हो तुम भी, पर कोशिश न करना कीमत लगाने की, जिसके बदले में बिक जाये इमान मेरा, … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: करते हैं वही जो हमारा उसूल है, युं ही समझ जाओगे हमें तुम्हारी भूल है, बहुत गहरा समन्दर है मेरे जज्बा … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: भगवान को मानना तो जाने कब से छोड़ दिया है पर मंदिर के सामने बिना कुछ सोचे ही सर झुक जाता है कम्बख्त क … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: सच कहू तो बस एक ख्वाब हो तुम, दोस्ती नही की तुम से कुछ पाने के लिए, अपनी बातों से बस तुम्हे हॅसाना च … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: जो भी जॉब के लिए घर से दूर हैं शायद उन सब के दिल में यही जज्बात होंगे | ये चार लाईने मैं अपनी माँ क … more →