Blogs about: Shayree
चतुराई से मुट्ठी में कर लो-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हाथ में डंडे और मुहँ में नारे चले हैं स … more »
मजदूरों के पसीने के बिना महल नहीं बन पाते-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अपने लिए नहीं मांगते सिंहासन दो पल की … more »
अँधेरे का व्यापार
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: वादों के बादल बरसने का मौसम जब आता है य … more »
मन को झूठ के सहारे कब तक बहलायें
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दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: यूं ही कहीं देख लें बाग़ तो दिल मचल जात … more »
वादे करने और भूलने का सिलसिला
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पूरे करने होते काम तो वादे किए ही क्यो … more »
सच का रास्ता ही दिल तक जाता है
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: वक्त ने देखा है सबको उसे चलते भले देखत … more »
मामला एक कंपनी का
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: हीरो ने कहा निर्देशक और निर्माता से … more »
कौन चाहेगा चेतना की ज्योति जगाना
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: वादे कर भूल जाना अपने कहे से पलट कर कुछ … more »
फ्लाप से जोड़ दो फ्लाप
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: क्रिकेट फ्लॉप फिल्म फ्लॉप सपनों के सौ … more »
यहाँ बदलते हैं रिश्ते
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जब काम था वह रोज हमारे गरीबखाने पर आये … more »
शायद कभी छपे अच्छी खबर
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हर सुबह अपने घर के दरवाजे पर रखा उठाता … more »
दिल हुआ इधर से उधर
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दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अंतरजाल पर एक दूसरे के ब्लोग पर कमेन्ट … more »
रावण तुम कभी मर नहीं सकते-कविता
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: रावण तुम कभी मर नहीं सकते क्योंकि तुम् … more »
हास्य कविता-बीस का नोट पचास में नहीं चलेगा
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दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: बीस के शेर पचास में ढ़ेर जीतते हैं तो फु … more »
असंतोष के सिंह तुम मांद में रहो-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: असंतोष के सिंह तुम मांद में रहो तुम्हा … more »
अपने ही लोगों की वाह-वाही चाहिए
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: लिपि रोमन हो गयी है कॉमन अब इस दुनिया क … more »
क्रिकेट देखने से अच्छा है ब्लोग पर लिखें
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: यूँ तो हारने के हजार बहाने हैं पर घर म … more »
डाक्टर और अस्पताल की छाया-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: एक आदमी ने सुबह-सुबह दौड़ लगाने का कार … more »
हास्य कविता -बीस का नोट पचास में नहीं चलेगा
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: बीस के शेर पचास में ढ़ेर जीतते हैं तो फु … more »
