वादों के बादल बरसने का मौसम जब आता है यादों पर ग्रहण लग जाता है जजबातों के सौदागर तय करते हैं कि कौनसा सा वादा बरसाया जाये किस याद को लोगों के दिमाग से भुलाया जाये तमाम के लगाते नारे रचकर हवाई किला कि… more →
दीपकबापू कहिनwrote 2 years ago: आतंकवाद एक व्यापार है, और यह संभव नहीं है कि बिना पैसे लिये कोई आतंक फैलाता हो। अभी अखबार में एक खबर … more →
wrote 3 years ago: चौराहे पर खड़े पत्थर के बुत पर कंकड़ लगने पर भी लोग भड़क जाते हैं। अगला निशाना खुद होंगे यह भय सताता है … more →
wrote 5 years ago: अपने लिए नहीं मांगते सिंहासन दो पल की रोटी की खातिर मजदूर इधर से उधर जाते अपने पसीने की धारा में अपन … more →
wrote 5 years ago: वादों के बादल बरसने का मौसम जब आता है यादों पर ग्रहण लग जाता है जजबातों के सौदागर तय करते हैं कि कौन … more →
wrote 5 years ago: वक्त ने देखा है सबको उसे चलते भले देखता न हो कोई बडे-बडे शिलालेखों पर नाम खुदवाकर कई राजाओं ने अमर ह … more →
wrote 5 years ago: बीस के शेर पचास में ढ़ेर जीतते हैं तो फुलाते सीना हारें तो कहें’समय का फेर’ समझाया था क्य … more →
wrote 5 years ago: वह प्रतिदिन हिट होने के नुस्खे सबको बताएं और शब्दों के डाक्टर कहलाये मरीज पढ़ते नुस्खा जब तक डाक्टर स … more →
wrote 5 years ago: आपस में मिले दो असफल लेखक पहले पाठकों पर भंडास निकाली फिर अपना नाम किसी भी कीमत पर पत्र-पत्रिकाओं मे … more →
wrote 5 years ago: इंडियन आइडियल का नशा एक दिन ही चढ़ा दूसरे दिन उतरा बालक को करा रहे थे माता-पिता म्यूजिक की प्रेक्टिस … more →
wrote 5 years ago: भक्त से पूछा गया ‘बता राम कौन है’ जो मनुष्यदेह धारण किये हो और पूछे ऐसा प्रश्न इस अहंकार … more →
wrote 5 years ago: पांच दिन से एक दिन अब क्रिकेट खेल के रह गये बीस ओवर बाजार में देश प्रेम की भावनाओं का भुनाते ख़ूब चल … more →