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Blogs about: Shelter

क्यों बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता3 comments

विनय wrote 1 year ago: क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता क्यों? मुझे बेक़रारियों से क़रार नहीं मिलता क्यों? ढल रहा हूँ दि … more →

Tags: मेरी नज़्म, ज़हन, इश्क़, Love, Mind, प्यार, कोशिश, मोहब्बत, क़रार

उफ़! यह छाँव की उमस

विनय wrote 1 year ago: उफ़! यह छाँव की उमस तौबा यह झूठे फ़साने उम्मीद की धूप रिस गयी है शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, ज़िन्दगी, उम्मीद, उफ़, धूप, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत

कितना काला पड़ गया हूँ2 comments

विनय wrote 1 year ago: मैं तेरे इश्क़ की छाँव में जल-जलकर कितना काला पड़ गया हूँ, आकर देख तू मुझे हुस्न की धूप का एक टुकड़ा … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, हुस्न, धूप, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, Shadow, Beauty


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