दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: प्रेमी अपनी प्रेमिका का हाथ माँगने उसकी माँ के पास पहुँचा तब वह गुस्से में बोली ‘तुम्हारे प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: डाक्टर साहब ने रास्ते में स्कूटर रोककर कबाड़ी से कहा ‘तुम कालोनी में आते हो पर हमारे घर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तुम अपने हृदय में घूमते हुए विचारों और मस्तिष्क में चिन्त्तन और मनन से उपजे शब्दों को लिखना कोई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस आदमी ने मशहूर लेखक पर अनेक पत्थर फैंके हर बार यही कहता कि ‘यह तेरे उन शब्दों का बदला है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बाप ने बेटी की शादी में दहेज के रूप में टीवी,फ्रिज,पलंग,ऐसी और भी ढेर सारा सामान दिया और दूल्हे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: थका हारा आदमी काम से जब घर वापस लौटा तो सास-बहू में कोहराम मचा हुआ था बाप बाहर सिर पकड़े बैठा था त … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन्त्री जी ने मीटिंग में अपने सचिव से कहा’- इस बार के वार्षिक पुरस्कार के लिये ऐसे लेखक का … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शहर में गंदगी के ढेर देखकर अंग्रेज पर्यटक ने स्थानीय गाइड से पूछा -’ हमने सुना है जब हमार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पैसा है तो पाने के लिये प्यार है पद है तो खाने के लिये पकवान है प्रतिष्ठा है तो पहचान है राजा ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी अलग पहचान के लिये भीड़ से अलग होना ही पड़ता है जब चुनते हैं अपनी अलग राह छोड़नी पड़ती है साथी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फटे हुए कपडे पहने चक्षुओं से अश्रु प्रवाहित करता हुआ फंदेबाज आ पहुंचा और बोला ”दीपक बापू आज ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर लिखने वाले एक कविनुमा ब्लोगर को भी आयोजकों ने कविसम्मेलन में बुलाया जब वह भी पहुंचा मंच … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आओ कुछ पल के लिए आत्ममुग्ध हो जाएं चलो अपने ब्लोग पर लिख आयें हमारे लिखने से ज़माना नहीं बदल जायेगा प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: निजी अस्पतालों के बाहर लिखा रहता है ‘गरीबों का इलाज मुफ्त किया जाता है’ शायद इसलिए उनके … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज को टुकडों-टुकडों में बांटकर उसे अब दिखाने के लिए सजाते हर टुकड़े पर लगते मिटटी का लेप और रंग-बिर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वक्त ने देखा है सबको उसे चलते भले देखता न हो कोई बडे-बडे शिलालेखों पर नाम खुदवाकर कई राजाओं ने अमर ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: असली सांप पालते तो शायद अकारण डसने का ख़तरा नही नजर नहीं आता पर सांप जैसे मन वाले इंसानों को पालने व … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आपस में मिले दो असफल लेखक पहले पाठकों पर भंडास निकाली फिर अपना नाम किसी भी कीमत पर पत्र-पत्रिकाओं मे … more →