Blogs about: Sher O Shayree

'मेरे पास बस प्यार है' -hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: प्रेमी अपनी प्रेमिका का हाथ माँगने  उसकी  माँ के पास पहुँचा  तब वह गुस्से में बोली ‘तुम्हारे प … more →

Tags: Art, अभिव्यक्ति, आचरण, कविता, क्षणिका, बिंब-प्रतिबिंब, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, शायरी

कबाड़ और इंजेक्शन

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: डाक्टर साहब ने रास्ते में  स्कूटर   रोककर कबाड़ी से कहा  ‘तुम कालोनी  में आते हो  पर हमारे घर … more →

Tags: Blogroll, हिंदी, feature blog, shayree, अभिव्यक्ति, शायरी, चरित्र, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य

लिखते हुए कभी नहीं डरना

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तुम अपने हृदय में  घूमते  हुए विचारों और  मस्तिष्क में चिन्त्तन और मनन से  उपजे शब्दों को लिखना कोई … more →

Tags: Art, अनुगूंज, अभिव्यक्ति, आदमी, कविता, चरित्र, दृष्टिकोण, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब

चिडी के बादशाह और हुकुम के गुलाम

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस आदमी ने मशहूर लेखक  पर अनेक पत्थर फैंके हर बार यही कहता कि  ‘यह तेरे उन शब्दों का बदला है … more →

Tags: Art, अभिव्यक्ति, आचरण, आदमी, कविता, क्षणिका, ताल-बेताल, दृश्य, प्रतिबिंब

बोझ फिर चढ़ा दिया

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बाप ने बेटी की शादी में  दहेज के रूप में  टीवी,फ्रिज,पलंग,ऐसी और भी ढेर सारा सामान दिया और  दूल्हे … more →

Tags: हिन्दी, कविता, shayree, शेर-ओ-शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, arebic, क्षणिका

सास-बहू का सीरियल और झगडा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: थका हारा आदमी काम से जब घर वापस लौटा तो सास-बहू में कोहराम मचा हुआ था बाप बाहर सिर पकड़े बैठा था त … more →

Tags: arebic, Art, अनुगूंज, अभिव्यक्ति, कविता, क्षणिका, गौरव, दृश्य, व्यंग्य

पुरस्कार ऐसे ही नहीं मिल जाते

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:   मन्त्री जी ने मीटिंग में अपने सचिव से कहा’- इस बार के वार्षिक पुरस्कार के लिये ऐसे लेखक का … more →

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गंदगी के ढेर भी काम आते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:   शहर में गंदगी के ढेर देखकर  अंग्रेज पर्यटक ने स्थानीय  गाइड से पूछा -’ हमने सुना है जब हमार … more →

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पद, पैसा और प्रतिष्ठा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:   पैसा है तो पाने के लिये प्यार है पद है तो खाने के लिये पकवान है प्रतिष्ठा है तो पहचान है   राजा ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, अमेरिका, आचरण, कविता, क्षणिका, चरित्र, पहचान, प्रतिष्ठा, माया

भीड़ से अलग पहचान के लिए अकेले हो जाते- व्यंग्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी अलग पहचान के लिये भीड़ से अलग होना ही पड़ता है जब चुनते हैं अपनी अलग राह छोड़नी पड़ती है साथी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, शायरी

प्यार और नफरत, दोनों पर यकीन नहीं-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, क्षणिका, ताल-बेताल, दीपक भारतदीप, दृश्य, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

दिल से सम्मान करे वही है सच्चा वीर-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फटे हुए कपडे पहने चक्षुओं से अश्रु प्रवाहित करता हुआ फंदेबाज आ पहुंचा और  बोला ”दीपक बापू आज ह … more →

Tags: vews, inglish, Global Dashboard, कविता, शेर-ओ-शायरी, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Life

अपना नाम भी होगा-हास्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर लिखने वाले एक कविनुमा ब्लोगर को भी आयोजकों ने कविसम्मेलन में बुलाया जब वह भी पहुंचा मंच … more →

Tags: Blogroll, hindi, शेर-ओ-शायरी, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Life, Internet

कुछ देर आत्ममुग्ध हो जाएं, ब्लोग पर लिख आयें-हास्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आओ कुछ पल के लिए आत्ममुग्ध हो जाएं चलो अपने ब्लोग पर लिख आयें हमारे लिखने से ज़माना नहीं बदल जायेगा प … more →

Tags: Blogroll, हिन्दी, कविता, शेर-ओ-शायरी, अभिव्यक्ति, नज़रिया, शायरी, सूचना, हास्य व्यंग्य

भजन करते-करते भक्त हो जायेंगे-हास्य क्षणिकाएँ 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: निजी अस्पतालों के बाहर लिखा रहता है ‘गरीबों का इलाज मुफ्त किया जाता है’ शायद इसलिए उनके … more →

Tags: हिन्दी, कविता, शेर-ओ-शायरी, संपादकीय, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य कविता, क्षणिका, Education

समाज के टुकडों को जोड़ता दिखाते

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज को टुकडों-टुकडों में बांटकर उसे अब दिखाने के लिए सजाते हर टुकड़े पर लगते मिटटी का लेप और रंग-बिर … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, चरित्र, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Bloging, Education, Blogging

सच का रास्ता ही दिल तक जाता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वक्त ने देखा है सबको उसे चलते भले देखता न हो कोई बडे-बडे शिलालेखों पर नाम खुदवाकर कई राजाओं ने अमर ह … more →

Tags: Blogroll, hindi, हिंदी, inglish, हिन्दी, shayree, शेर-ओ-शायरी, अभिव्यक्ति, शायरी

खोटी और खरी नीयत

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: असली सांप पालते तो शायद अकारण डसने का ख़तरा नही नजर नहीं आता पर सांप जैसे मन वाले इंसानों को पालने व … more →

Tags: दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शेर-ओ-शायरी, हास्य व्यंग्य, हिंदी, हिन्दी, bharat, Blogging, Bloging

असफल लेखकों की मनमानी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आपस में मिले दो असफल लेखक पहले पाठकों पर भंडास निकाली फिर अपना नाम किसी भी कीमत पर पत्र-पत्रिकाओं मे … more →

Tags: Blogroll, hindi, हिंदी, inglish, Dashboard, Global Dashboard, कविता, shayree, शायरी


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