विनय wrote 1 year ago: आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा यह तीर जो मेरे दिल तक पहुँचा ज़ख़्म देकर जो उसका जी न भरा दिल उसका मेरे दि … more →
विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →
विनय wrote 1 year ago: जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछताते हैं सच्चे-झूठे सपने तेरे रातों की नींदें उड़ाते हैं दो किनारे … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल की बस्तियाँ जलीं पर उठा नहीं धुँआ बुझाया आँखों से मैंने पर बुझा नहीं धुँआ बहुत देर तक टीस दबाये … more →