शीला के कदम जैसे हवा मे उड़ रहे थे.प्रशासन ने उसकी उम्र क़ैद की सज़ा 14 साल से घटा कर 10 साल कर दी थी -उसके अच्छे आचरण की वजह से. जैलर साहब को बड़ी आत्मीयता थी शीला से. सुघड़ सुशील सुशीला देवी, मे सब… more →
ए पंखुरी पपीहाratnakarmishra wrote 1 week ago: आज घर मैं कुछ नहीं है खाने को, भूख अब सहा नहीं जा रहा है ,आज मैं कुछ खाने का जुगार कर के ही लौटूगा. … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 3 weeks ago: प्रदर्शन की लालसा या प्रवृत्ति प्रायः हर मनुष्य के व्यक्तित्व का एक खास पहलू होता है । मैं इसे एक हा … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 1 month ago: रेलगाड़ी से यात्रा करना कभी-कभी असामान्य अनुभव दे जाता है, ऐसे अनुभव जो कभी आनंदित कर जाता है तो कभी … more →
Nidhi KM wrote 1 month ago: भरी धूप मे, आज ऑफीस जाते समय ही उसने सोच लिया था, शाम को घर वापस जाते समय, आज मंदिर जाऊंगी… मं … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 1 month ago: इस समय मैं अमेरिका की ‘सांता क्लारा’ नगरी में हूं, करीब एक माह के प्रवास पर । यह स्थान कैलिफोर्निया … more →
Gayatri wrote 3 months ago: शीला के कदम जैसे हवा मे उड़ रहे थे.प्रशासन ने उसकी उम्र क़ैद की सज़ा 14 साल से घटा कर 10 साल कर दी थ … more →
Gayatri wrote 3 months ago: प्रिय मित्रो , यह ब्लॉग इंड़ीब्लागेर पर सर्वशेषठ लघु कथा श्रेणी प्रतियोगिता मे नामांकित हुआ है. अगर … more →
Gayatri wrote 3 months ago: image courtsey picasa albums पश्याताप – एक लघु कथा आज : आंसू थे की किसना की आँखों का दामन तजते … more →
Gayatri wrote 3 months ago: दीपू आज बहुत खुश था .इतना खुश की ख़ुशी के मारे पूरी रात आँखों ही आँखों में काटी थी, बस कब सुबह हो औ … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: वह किसी मकान के लिये बन रही नींव के लिये गड्ढा खोद रहा था। उसके पास ही थोड़ी दूर स्थित मैदान में गरी … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: उसकी मां आई.सी.यू में भर्ती थी। वह और उसका चाचा बाहर टहल रहे थे। उसने चाचा से पूछा-‘चाचाजी, आपको क्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अपने वाद्ययंत्रों के साथ सजधजकर वह घर से बाहर निकला और अपनी मां से बोला-‘‘मां, आशीर्वाद दो जंग पर जा … more →
Gayatri wrote 2 years ago: “टन,टन,टन,टन्……॥’राधिका ने घबरा कर घडी की तरफ़ देखा। ” नौ बजने को आये हे,ना जाने कह … more →
Gayatri wrote 2 years ago: “क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ ?” ये शब्द सुनकर मेरा ध्यान उन की तरफ गया जों रेलवे प्लेटफार … more →