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तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है7 comments

विनय wrote 8 months ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, arrow, अदा, इश्क़, कटार, गुफ़्तार, चमन, जानिब, तीर

जो मुझको जानते हैं5 comments

विनय wrote 1 year ago: जो मुझको जानते हैं ज़रा कम जानते हैं जो नहीं जानते हैं ज़रा ज़्यादा जानते हैं जो ढीठ बनके बैठा हुआ है म … more →

Tags: मेरी नज़्म, शिकन, फ़ितरत, Pain, चाहत, सूरज, जानिब, desire, तड़प

इस जानिब य उस जानिब

विनय wrote 1 year ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन ‘ग़ालिब’ एक बला है दर्दे-निहाँ कौन बुरा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, रात, जानिब, नज़र, dream, Night, ज़ख़्म, Silence

अश्को-अक्स चश्म में नहीं है

विनय wrote 1 year ago: जितनी मै उन आँखों में थी उतनी और कहाँ जितना सुरूर उन आँखों में था उतना और कहाँ रोज़ शाम दरवाज़े पे बैठ … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, eyes, haze, प्यार, दरवाज़ा, मोहब्बत, शाम

गिर जायेगा इस बरसात में घर

विनय wrote 1 year ago: गिर जायेगा इस बरसात में घर तुम हो उधर हम हैं इधर जंगल ही जंगल है सब वीराना-सा जिस सिम्त दौड़ती है नज़ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, सफ़र, दुआ, नज़र, Journey

हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी

विनय wrote 2 years ago: हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी तुमको पाने की जुस्तजू छोड़ दी चाक़ जिगर को गरेबाँ में छिपाके हमने हसरते-रफ़ू … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, दर्द, Love, मौसम, प्यार, मोहब्बत, Pain, आरज़ू

शामे-दीपावली

विनय wrote 2 years ago: एक बार देखा था तुझे हाथों में चिराग़ लिए चौखट पर खड़ी थी चाँद की निगाहें तुझ पर टिकी थीं सारी ज़मीं नव … more →

Tags: मेरी नज़्म, Earth, चाँद, इश्क़, Love, दुल्हन, प्यार, मोहब्बत, ज़मीं


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