विनय wrote 3 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
विनय wrote 4 months ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →
विनय wrote 4 months ago: मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा … more →
विनय wrote 7 months ago: एक ख़ामोश अफ़साना जो तुम्हारी नज़रों ने सुनाया है मुझे काश! वह तुम अपने लबों से मेरे लबों पर लिखती कभी … more →
विनय wrote 7 months ago: हिक़ारत भरी नज़रों से जिसे देखा है दुनिया ने उसको तुम एक नज़र मोहब्बत से देख लेना, वह मुफ़लिस है मगर जीन … more →
विनय wrote 7 months ago: तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं … more →
विनय wrote 9 months ago: यह जिस्म नहीं है, काँच के टुकड़े हैं ज़मीने-वक़्त पर दूर तक बिखरे हैं इन्हें मत छूना हाथों में चुभ जाय … more →
विनय wrote 11 months ago: बड़ी उम्मीद से मैं चला था तआक़ुब-ए-इश्क़ पर और दीदार उसका मुझको ही घायल कर गया है अब सुबह का चाँद और श … more →
विनय wrote 11 months ago: ख़ुशबू बिछायी है राहों में तुम चले आओ, तुम चले आओ दिल बेक़रार है बहुत तुम चले आओ, तुम चले आओ मौसम बड़ … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, लबों को भी न तस्लीम एक बूँद आब है रोज़-रोज़ की मुश्किली, यह … more →
विनय wrote 1 year ago: न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ कम-स-कम बाहम निगाहों में गु … more →
विनय wrote 1 year ago: एक दोस्त मेरा भी हो एक यार मेरा भी हो जिसकी बाँहों में मुझे मिल जाये ज़िन्दगी जो झूठ-मूठ रूठ के सताये … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ु … more →
विनय wrote 1 year ago: दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं उनके दीदार से जो मुझे सुकून है … more →
विनय wrote 1 year ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो च … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पलकों में क़ैद है दिल के पास है क्या देखूँ तेरे सिवा क्या चाहूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़ोर से दिल धड़कता है (हाँ धड़कता है) तूफ़ान साँसों में चलता है (हाँ चलता है) आँखें ठहर जाती हैं तस्वी … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी वैसे होता है, कभी ऐसे होता है यह प्यार जो होता है, प्यार ही रहता है… तुमको सब पता है हमक … more →
विनय wrote 1 year ago: यह प्यार चीज़ क्या है? दीवानों का है काम बेकार ही पीछे दौड़ते हैं बिन सोचे अन्जाम कहते थे कि प्यार हम … more →