रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका चाँद को कभी बादलों से उठाया भी गदेली पर रखकर उसे कभी होंटों तक लाया भी रातभर चाँद देखा किये माज़ी मे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 6 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →
विनय wrote 8 months ago: एक ख़ामोश अफ़साना जो तुम्हारी नज़रों ने सुनाया है मुझे काश! वह तुम अपने लबों से मेरे लबों पर लिखती कभी … more →
विनय wrote 1 year ago: दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं उनके दीदार से जो मुझे सुकून है … more →
विनय wrote 1 year ago: नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की कैसे दिखाऊँ तुम्हें उल्फ़त दिल की मजरूह तेरे प्यार ने मुझको किया देख … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत उदास-सी एक शाम बैठी है मेरे साथ अपने ख़ामोश लबों से कह देती है अनकही बातें दोनों बहुत देर तक बै … more →