दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं उनके दीदा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के … more →
विनय wrote 9 months ago: नामंज़ूर थी पेशकश तुम्हें दिल की कैसे द … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत उदास-सी एक शाम बैठी है मेरे साथ अप … more →