मोहोब्बतें आँखों से आँखों का फलसफा कहती खामोशियों में भी मदहोश सी बहती मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे दिल में रहती क्यों बदलासा लगता है फ़िज़ायों का वही मौसम क्यों अपनासा महसूस होता है पराया मन खुद से भ… more →
mehekदीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि ———————— तारा मण् … more →
Ajad Panchhi wrote 4 months ago: Sky says affected boxes don’t pose a safety risk to cust … more →
pryas wrote 9 months ago: तुम भूल जाओ या याद रखो, कोई आयेगा इसकी आस रखो. धूप में पिघल जायेंगे सपने, जुल्फों की छाँव पास रखो. ह … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मोहोब्बतें आँखों से आँखों का फलसफा कहती खामोशियों में भी मदहोश सी बहती मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे … more →
विनय wrote 1 year ago: वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी जिसका इंतिज़ार करता हूँ यारा जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा वह कब आयेगी जो … more →
विनय wrote 1 year ago: आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा यह तीर जो मेरे दिल तक पहुँचा ज़ख़्म देकर जो उसका जी न भरा दिल उसका मेरे दि … more →
विनय wrote 1 year ago: जब आसमाँ पे यह हिलाल आया मुझे याद तुमसे विसाल आया जिस शब तारों की बारात आयी मुझे तुम्हारा ही ख़्याल … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने आसमाँ से टूटके गिरते सितारे को ज़मीं पे आते देखा है आसमाँ पे था तो चमकता था ज़मीं पे है तो दहकता … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो जैस … more →
विनय wrote 1 year ago: In my eyes You live only Without you I live lonely When you’re coming Tell me baby When you … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरे बचपन की ख़ुशबू मेरे साथ ही चलती है कभी मेरे ख़ाब में कभी किताब में मिलती है कभी पतंगों के साथ आ … more →
विनय wrote 1 year ago: What you did was very wrong Up to every context, every limit I was neither your lover nor your frien … more →
विनय wrote 1 year ago: आज फिर धुँधले बादलों के पार देखा चाँद, सुनहरा चाँद… आज फिर तेरी याद आयी, आज फिर मेरा जिस्म महक … more →