वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक ख़ाब माना हमने जिसको वह छाला बनकर फूटा भी जिस कशिश पे हम मर बैठे उस कशिश ने दिल लूटा भी शायिर: विनय … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 months ago: वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: समय लाभ सम लाभ नहिं, समय चूक सम चूक चतुरन चित रहिमन लगी, समय चूक की हूक कविवर रहीम कहते हैं कि समय … more →