क्वचित प्रकाशं क्वचित्प्रकाशं, नभ: प्रकीर्णाम बुधरम विभाति । क्वचित क्वचित पर्वत सनिरुद्धम , रुपं यथा शान्त महार्णवस्य ॥ बिलकुल शुरुआती श्लोकों में से एक । आदरणीय गुरु रामचन्द्र शास्त्री का सिखाया हुआ… more →
यही है वह जगहअफ़लातून wrote 4 months ago: क्वचित प्रकाशं क्वचित्प्रकाशं, नभ: प्रकीर्णाम बुधरम विभाति । क्वचित क्वचित पर्वत सनिरुद्धम , रुपं यथ … more →