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एक पुराना मौसम लौटा
एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी, … more »
कुछ पल जगजीत सिंह के नाम
शाम से आँख में नमी सी है
Amarjeet Singh wrote 8 months ago: … more »
एक पुराना मौसम लौटा
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Amarjeet Singh wrote 8 months ago: एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, … more »
एक परवाज़ दिखाई दी है
Amarjeet Singh wrote 8 months ago: एक परवाज़ दिखाई दी है, तेरी आवाज़ सुनाई द … more »
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
Amarjeet Singh wrote 8 months ago: हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते, व … more »
आँखों में जल रहा है क्यूं बुझता नही धुँआ
Amarjeet Singh wrote 8 months ago: आँखों में जल रहा है क्यूं, बुझता नही धु … more »
ज़िंदगी यूँ हुयी बसर तन्हा
Amarjeet Singh wrote 8 months ago: ज़िंदगी यूँ हुयी बसर तन्हा, काफिला साथ … more »
वो ख़त के पुर्जे उडा रहा था
Amarjeet Singh wrote 8 months ago: वो ख़त के पुर्जे उडा रहा था, हवाओं का रू … more »
शाम से आँख में नमी सी है
Amarjeet Singh wrote 8 months ago: शाम से आँख में नमी सी है, आज फ़िर आपकी कम … more »
ज़िंदगी क्या है - कोई बात चले
Amarjeet Singh wrote 9 months ago: … more »
क्या बताऍ के जॉ गई कैसे
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Amarjeet Singh wrote 1 year ago: क्या बताऍ के जॉ गई कैसे फिर से दोहराऍ व … more »
तेरी सूरत जो भरी रहती है आँखों में सदा
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Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तेरी सूरत जो भरी रहती है आँखों में सदा … more »
है लौ ज़िंदगी
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Amarjeet Singh wrote 1 year ago: है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है मगर इस पे जल … more »
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे अहसान … more »
सहमा सहमा
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Amarjeet Singh wrote 1 year ago: सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यूँ जी … more »
फुलों की तरह लब खोल कभी
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Amarjeet Singh wrote 1 year ago: फुलों की तरह लब खोल कभी ख़ूश्बू की ज़ुबा … more »
ज़िंदगी क्या है जानने के लिये
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Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ज़िंदगी क्या है जानने के लिये ज़िंदा रहन … more »
आप अगर इन दिनो यहाँ होते
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Amarjeet Singh wrote 1 year ago: आप अगर इन दिनो यहाँ होते हम ज़मीन पर भला … more »
नज़र उठाओ ज़रा तुम तो क़ायनात चल
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Amarjeet Singh wrote 1 year ago: नज़र उठाओ ज़रा तुम तो क़ायनात चले, है इन्त … more »
