एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी, यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं, कितनी सौंधी लगती है तब माझी की रुसवाई भी, दो दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAjad Panchhi wrote 9 months ago: Two of the defendants argued their innocence on Sunday in a webcast The founders of a website which … more →
Ajad Panchhi wrote 9 months ago: Maggie Shiels visited the CES show’s Digital Experience, billed as the biggest media event of … more →
pryas wrote 10 months ago: शनिवार (10.01.2009) को सुभाष जी को फोन किया कि फ़ोटोफेयर चलना है तो फटाफट आ जाओ. उन्होंने कहा, … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी, यादों की बौछारों से … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: एक परवाज़ दिखाई दी है, तेरी आवाज़ सुनाई दी है, जिस की आँखों में कटी थीं सदियां, उस ने सदियों की जुदाई … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते, वक़्त की शाख से लम्हे नहीं तोड़ा करते, जिस की आवाज़ में सिलवट हो … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: आँखों में जल रहा है क्यूं, बुझता नही धुँआ, उठता तो है घटा सा बरसता नही धुँआ, चूल्हा नही जलाया य बस्त … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ज़िंदगी यूँ हुयी बसर तन्हा, काफिला साथ और सफर तन्हा, अपने साये से चौंक जाते हैं, उम्र गुजरी है इस कदर … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: वो ख़त के पुर्जे उडा रहा था, हवाओं का रूख दिखा रहा था, कुछ और भी हो गया नुमाया, मैं अपना लिखा मिटा र … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: शाम से आँख में नमी सी है, आज फ़िर आपकी कमी सी है, दफ़न कर दो हमें की साँस मिले, नब्ज़ कुछ देर से थमी … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: क्या बताऍ के जॉ गई कैसे फिर से दोहराऍ वो घड़ी कैसे क्या बताऍ के जॉ गई कैसे किसने रास्ते मे चॉद रखा था … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: तेरी सूरत जो भरी रहती है आँखों में सदा अजनबी चेहरे भी पहचाने से लगते हैं मुझे तेरे रिश्तों में तो दु … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है मगर इस पे जलने का दस्तूर है लौ ज़िंदगी कभी सामने आता मिलने उसे बड़ा नाम् उस … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे अहसान उतारता है कोई। आईना दिख के तसल्ली हुई हमको इस घर में जानता है … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है सहमा सहमा डरा सा रहता है इश्क में और कुछ नहीं … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: फुलों की तरह लब खोल कभी ख़ूश्बू की ज़ुबा मे बोल कभी अलफ़ाज़ परखता रेहता है आवाज़ हमारी तोल कभी अन्मोल नही … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: ज़िंदगी क्या है जानने के लिये ज़िंदा रहना बहुत जरुरी है आज तक कोई भी रहा तो नही सारी वादी उदास बैठी है … more →