Blogs about: Sorrow

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ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया2 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »

Tags: मेरा गीत

आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा4 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा च … more »

Tags: मेरा गीत

किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी फिर हल्की- … more »

Tags: मेरा गीत

मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सह … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

तुम न समझोगे2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

एक तसल्ली

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: एक तसल्ली मेरे पाँव के नीचे से गुज़रती … more »

Tags: मेरा गीत

वह शाम फिर आयी

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह शाम फिर आयी वह गुलाबी चाँद फिर आया व … more »

Tags: मेरा गीत

तेरी तस्वीर से बातें करता2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तेरी तस्वीर से बातें करता रोज़ मैं पास … more »

Tags: मेरा गीत

मैं अगर एक तरफ़ा हूँ

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं अगर एक तरफ़ा हूँ तो यह भी सही इस बद्त … more »

Tags: मेरी त्रिवेणी

आज फिर आसमाँ पे2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद … more »

Tags: मेरा गीत

ग़म देना उनकी फ़ितरत

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: ग़म देना उनकी फ़ितरत में शामिल होगा मेरी … more »

Tags: फुटकर कलाम

मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है

विनय प्रजापति wrote 4 months ago: मेरा   दर्द    मेरा   दु:ख   मेरा  अपना     … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

दीप जलाओ रात को पूनम कर दो

विनय प्रजापति wrote 4 months ago: दीप जलाओ रात को पूनम कर दो मेहबूब की या … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

न रखो वह तस्वीरें हरी जिनसे दिल दुखता हो

विनय प्रजापति wrote 4 months ago: न रखो वह तस्वीरें हरी जिनसे दिल दुखता … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनामी में

विनय प्रजापति wrote 4 months ago: राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनाम … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब

विनय प्रजापति wrote 4 months ago: कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब दामने- … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही

विनय प्रजापति wrote 4 months ago: नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही वह जो है मा … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का

विनय प्रजापति wrote 5 months ago: ख़स्ताहाल है जो तेरा बीमार क्यों नहीं … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

शब हुई चाँद आया

विनय प्रजापति wrote 5 months ago: शब हुई चाँद आया तेरे ग़म ने अँगड़ाई ली क़ … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल


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