जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे मोहब्बत सादा-सादा इक यह फ़र्द तुझ तक पहुँचे धूप सारे आलम में महकी हुई है हर-सू कि मेरे सीने की यह सर… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 6 months ago: जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे … more →
विनय wrote 7 months ago: सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भर … more →
विनय wrote 11 months ago: बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म साँस के एक ही धागे में टुकड़े-टुकड़े बिखरी हुई ज़िन्दगी बहुत नज़दीक़ लगी है त … more →
विनय wrote 11 months ago: यूँ तो दिल में इक ख़ला बसा रखी है हमने, लेकिन कभी-कभी सितारों के टुकड़े भी गुज़रते हैं इधर से मैंने उ … more →
विनय wrote 1 year ago: वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दिल को मेरे अपना तो जाना … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने तो कभी दिल की अंधी ख़ला में किसी चाँद को रोशन होते नहीं देखा शायद आतिशी इंतकाल था सितारे का शाय … more →