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Blogs about: Spandan

विष वृक्ष

gulabkothari wrote 3 weeks ago: महाराष्ट्र में एक विधायक को राष्ट्र भाषा में शपथ लेने के कारण पार्टी विशेष के विधायकों की आक्रामकता … more →

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फैसला तो करो!

gulabkothari wrote 1 month ago: भारत आज एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। उसे अपनी क्षमता सिद्ध करते हुए शिखर पर भी पहुंचना है और स्वा … more →

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उलूक

gulabkothari wrote 1 month ago: उलूक यानी उल्लू, लक्ष्मी का वाहन। जो लक्ष्मी के साथ रहकर भी अंधेरे को प्रकाश मानकर विचरण करे, वही उल … more →

Tags: उलूक, गुलाब कोठारी, gulab kothari, patrika.com, rajasthanpatrika.com

षोडशी-2

gulabkothari wrote 2 months ago: षोडषी अथवा स्वीट सिक्सटीन की अवधारणा इसलिए महत्वपूर्ण है कि जन्म के बाद प्रतिवर्ष एक-एक कला का पूर्ण … more →

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षोडशी

gulabkothari wrote 2 months ago: हमारे देश में पौराणिक देवियों को षोडशी माना जाता है। कहा जाता है कि इनकी आयु सदा सोलह साल की ही रहती … more →

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सकारात्मक भाव

gulabkothari wrote 2 months ago: व्यक्ति का जीवन भावों के आधार पर चलता है। भाव ही जीवन का स्वरूप तय करते हैं, जीवन को गति प्रदान करते … more →

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ज्ञान-कर्म-3

gulabkothari wrote 2 months ago: जीवन में व्यवहार के दो धरातल हैं। एक ज्ञान प्रधान और दो, क्रिया प्रधान। ज्ञान प्रधानता में- संकल्प, … more →

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ज्ञान-कर्म-2

gulabkothari wrote 2 months ago: ज्ञान और कर्म अलग नहीं हैं। सदा ही साथ रहते हैं। आनन्द- विज्ञान-मन-प्राण-वाक् (शरीर) से हमारे पंचकोश … more →

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ज्ञान-कर्म-1

gulabkothari wrote 3 months ago: वेवेद शब्द विद् धातु से बना है। इसका अर्थ है ज्ञान अथवा लाभ। ज्ञान का स्वरूप निर्घारण करने से पहले ज … more →

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आनन्द

gulabkothari wrote 3 months ago: जिसकी जीवन भर सबको तलाश रहती है उसी को आनंद कहते हैं। सम्पूर्ण सुख-समृद्धि का सूचक शब्द है। और सृष्ट … more →

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सेवा

gulabkothari wrote 3 months ago: प्रत्येक व्यक्ति को सौ साल का जीवन मिलता है। यह सौ साल शरीर की औसत आयु होती है। इसमें रहने वाला जीव … more →

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वेद2 comments

gulabkothari wrote 3 months ago: हमारे शास्त्रों को केवल रटा और रटाया जाता है। इसी कारण न वेद समझ पाए हैं, न वेद का ज्ञान व्यवस्थित र … more →

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क्लेश2 comments

gulabkothari wrote 4 months ago: कष्ट को ही क्लेश कहते हैं। जीव, अविद्या और क्लेश पर्यायवाची हैं। ईश्वर विद्या रूप है। वहां क्लेश होत … more →

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बाहरी ज्ञान

gulabkothari wrote 4 months ago: आदमी खाता है ठोकरें अपनी होशियारी के कारण मानता है स्वयं को अपना भाग्यविधाता करता है मनमानी उधार के … more →

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संकल्प-4

gulabkothari wrote 4 months ago: प्रारब्ध भी देता … more →

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देववाणी संस्कृत2 comments

gulabkothari wrote 4 months ago: यह जयपुर अथवा छोटी काशी का ही सौभाग्य है कि यहां पर तीन दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन हो रहा … more →

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नई संस्कृति3 comments

gulabkothari wrote 4 months ago: किसी भी देश की पह … more →

भाग्य की लकीरें8 comments

gulabkothari wrote 4 months ago: दूर बैठे भी मां जानती है बच्चे के हालात बाप नहीं जानता। बच्चा खाना खाते ही कह उठता है “मां ने … more →

Tags: Poem, गुलाब कोठारी, भाग्य की लकीरें, gulab kothari, patrika, patrika.com, Rajasthan Patrika, rajasthanpatrika.com

तपन1 comment

gulabkothari wrote 4 months ago: जीवन के लिए शास्त्रों में अनेक विधान उपलब्ध कराए हैं। पुरूषार्थ एक है। ज्ञान मार्ग,कर्म मार्ग,भक्ति … more →

Tags: गुलाब कोठारी, तपन, gulab kothari, patrika, patrika.com, Rajasthan Patrika, rajasthanpatrika.com


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