ऐनक उतार के ख़ुद को आइने में कभी देखा होता कि इक नूर का टुकड़ा हो मेरे ख़ाबों में चुभता है जो –x– ऐनक उतार के कभी ख़ुद को आइने में देखा होता कि इक नूर की बूँद हो मेरी आँखों में भर आयी है ज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: ऐनक उतार के ख़ुद को आइने में कभी देखा होता कि इक नूर का टुकड़ा हो मेरे ख़ाबों में चुभता है जो … more →