वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा नम है नफ़स-… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 5 months ago: वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा मु … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सित … more →