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Blogs about: Spikenard

ख़ुदाया कभी करम मुझ पर भी

विनय wrote 2 years ago: ख़ुदाया1 कभी करम मुझ पर भी सुम्बुल2 की थोड़ी मेहर इधर भी प्यार क्या है नहीं जानता मैं मगर सिखा दे मु … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, चाँद, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, ख़बर, ख़ुदा

इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं

विनय wrote 2 years ago: इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं दीजिए अगर आपको इल्ज़ाम देने हैं और कौन दूसरा सितम-परस्त होगा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Abuse, always, इम्तिहाँ, इल्ज़ाम, इश्क़, इस्लाम, काफ़िर, नज़र


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