हम जैसा सोचते हैं वैसे ही हैं। यदि सोचते हैं कि हम पराजित हैं, तो हम पराजित हैं। यदि सोचते हैं कि हममें साहस नही हैं,तो नही हैं। यदि हम जीतना चाहते हैं परन्तु सोचते हैं कि नहीं जीत सकते , तो यह निश्चि… more →
उठो! जागो!jayantijain wrote 1 month ago: हम जैसा सोचते हैं वैसे ही हैं। यदि सोचते हैं कि हम पराजित हैं, तो हम पराजित हैं। यदि सोचते हैं कि हम … more →
jayantijain wrote 1 month ago: हम दिवाली की शुभकामनाएँ लेने देने में विगत दो तीन दिनो सें व्यस्त हैं,लेकिन इन शुभकामनाओं की लेनदेन … more →
jayantijain wrote 1 month ago: शत शत अभिनन्दन! ढेरों शुभ कामनाएँ! विजय पर्व, ज्ञान पर्व, अर्थ पर्व , प्रकाष पर्व राम का पुनरागमन प … more →
jayantijain wrote 1 month ago: नकारात्मकता को पहचाने बिना उसे सकारात्मकता में नही बदला जा सकता है। नकारात्मकता क्या है ? इसे समझने … more →
jayantijain wrote 1 month ago: सफल स्वस्थ और सुमधुर जीवन का पहला और आखिरी मंत्र है: सकारात्मक सोच। यह अकेला ऐसा मंत्र है, जिससे न क … more →
jayantijain wrote 1 month ago: इस पर मुझे एक कहानी याद आती है। किसी दूधवाले की दूध की केन में एक नटखट बालक ने दुखीराम नामक मेढ़क को … more →
jayantijain wrote 1 month ago: नमस्ते करना परिचय का प्रतीक है। हम दिन में कइ्र्र बार नमस्ते करते हैं। लेकिन यह सदैव उन तक पहुँचता न … more →
jayantijain wrote 1 month ago: लोक व्यवहार की चाबी नमस्कार मे जादू है। नमस्कार संबन्धो का द्वार है। नमस्कार का अर्थ अभिवादन है। यह … more →
jayantijain wrote 1 month ago: मनोवैज्ञानिकों ने मन को दो बड़े भागों में विभक्त किया है। 1. चेतन मन – मस्तिष्क का वह भाग, … more →
jayantijain wrote 2 months ago: जब मैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, मुझे अवचेतन की शक्ति का ज्ञान नहीं था और इसका उपयोग … more →
jayantijain wrote 2 months ago: मैंने अपने अवचेतन मन का उपयोग अनजाने में ही सन् 1978 में किया । जब मैं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय … more →
jayantijain wrote 2 months ago: क्षमा कीजिए, मेहरबान, आज क्षमा वाणी का पर्व है। जैन दर्शन का यह एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त हैं। जैन ध … more →
jayantijain wrote 2 months ago: आज मेरा जन्म दिन है।शरीर आधारित जीवन जिया ,लेकिन चेतना आधारित जीवन नहीं जिया। ऐसे मे पिता का … more →
jayantijain wrote 2 months ago: हमारे जीवन के अनुभवों का आधार हमारी अनुभूतियाँ हैं और नकारात्मक दृष्टिकोण से नकारा प्रश्न खड़े होते ह … more →
jayantijain wrote 2 months ago: हम अपनी क्यों नहीं सुनते हैं ? हम अपनी व्यस्तता के कारण अपने से ही बहुत दूर चले गयें हैं । हमने अपनी … more →
jayantijain wrote 3 months ago: आज ही मैं अपने जीवन में समय के उपयोग के बारे में सोच रहा था कि हमारा समय कहाॅ कहाॅ एवं किस किस उपक्र … more →
jayantijain wrote 3 months ago: मैंने सुना है कि स्वामी विवेकानन्द एक बार रेल में यात्रा कर रहे थे। एक भिखारी ने अपनी गरीबी का हवाला … more →
jayantijain wrote 3 months ago: ’’हंसने से शक्ति आती है। अब चिकित्सा विज्ञान भी कहता है कि हंसी प्रकृति के द्वारा मनुष्य को दी गई दव … more →
jayantijain wrote 4 months ago: मैं अपने आदर्शें डाॅ. स्टीफन हाॅकिंग के बारे में चर्चा करना चाहूंगा, जिनसे मैं अपने कमजोर क्षणों में … more →