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Blogs about: Spot

ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी

विनय wrote 1 year ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ाने लगी दरख़्त की शाख़ों पर धूप की बूँदें नहीं सूरज का दरिया है … more →

Tags: मेरा गीत, Earth, Tree, ज़िन्दगी, बूँद, चाँद, धूप, इश्क़, Love

हम भी पागल थे ग़ैरों को अपना जानते थे1 comment

विनय wrote 1 year ago: हम भी पागल थे ग़ैरों को अपना जानते थे रुसवा किये जायेंगे इस क़दर यह न जानते थे बेवफ़ा गर वह होता दर्द श … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, Blame, Frozen, प्यार, मोहब्बत, Friendship, वफ़ा

दिल के दाग़ सभी ज़ख़्म हुए1 comment

विनय wrote 1 year ago: दिल के दाग़ सभी ज़ख़्म हुए वह ख़फ़ा हुआ हम ख़त्म हुए कोसूँ क्या अपनी क़िस्मत को हमें भी कुछ नये इल्म हुए … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, इश्क़, Love, Blame, सावन, प्यार, क़िस्मत, मोहब्बत

एक ख़ाब

विनय wrote 2 years ago: देखो ज़रा स्याह रात पे चाँद का पैबंद कितना खिल रहा है मेरे चाँद पे सितारों वाला नीला लिबास जितना खिल … more →

Tags: मेरी नज़्म, चाँद, रात, Night, Moon, स्याह, पैबंद, लिबास, dark blue


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