तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच निकलते है | अंधेरों का ख़ौफ़ नही रहा … more →
mehekविनय wrote 11 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →
विनय wrote 1 year ago: यूँ तो दिल में इक ख़ला बसा रखी है हमने, लेकिन कभी-कभी सितारों के टुकड़े भी गुज़रते हैं इधर से मैंने उ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ से … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.मुट्ठी भर चाँदनी पहेले रोज़ खिड़की पर आता था रात रात हमसे बतियाता था भोर की रश्मि आने पर भी हमे न … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने तो कभी दिल की अंधी ख़ला में किसी चाँद को रोशन होते नहीं देखा शायद आतिशी इंतकाल था सितारे का शाय … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने आसमाँ से टूटके गिरते सितारे को ज़मीं पे आते देखा है आसमाँ पे था तो चमकता था ज़मीं पे है तो दहकता … more →
विनय wrote 1 year ago: Day n’ night I dream her But we’re unknown to each other She’s my love, my life An … more →
विनय wrote 2 years ago: बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते एहसास से … more →