विनय wrote 1 year ago: यक़ीनन तुम्हारे हुस्न पे लाखों मरते होंगे मगर जो तुम पर मिट गया वह ‘नज़र’ है मेरी इब्तिदा … more →
विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’… नया जन्म हुआ है त … more →
विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेर … more →