मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, लबों को भी न तस्लीम एक बूँद आब है रोज़-रोज़… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, ल … more →
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता … more →