विनय प्रजापति wrote 5 months ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सह … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: जाने किस गली में, मैं चाँद भूल आया हूँ ज … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: रोज़े - शामे - दीवाली कोई नूरे - चराग़ न … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अप … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: सौंधी हुई एक खु़शबू मेरी आँखों में आकर … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: वो तस्कीं न मेरे दर पे माथा टेके न ही रौ … more →