बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इतने झुके कि कायरी का भरम देने लगे उस सर को, इज्ज़त से उठाने की ये कोशिश है बरसों बंधा पड़ा था कई अँधे… more →
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी: Awakening of Crushed AmbitionsRahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →