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जब कभी मैंने साँस ली
जब कभी मैंने साँस ली साथ तेरे नाम की फाँस ली पहरों नाराज़ थे ख़ुद से आज गुज़रे ह… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
जब कभी मैंने साँस ली
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: जब कभी मैंने साँस ली साथ तेरे नाम की फा … more »
आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं … more »
वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा मु … more »
आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा च … more »
जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे हम को शाइ … more »
ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार क … more »
दिल तोड़ना at first sight
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: दिल तोड़ना at first sight झूठा गुस्सा उस पर झूठ … more »
माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ हुस … more »
वह तो कमाल है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह तो कमाल है, इक वबाल है ज़ुल्फ़ों में जि … more »
चुपके से दिल को दिया
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: चुपके से दिल को दिया चुपके से दिल को लि … more »
तुमसे कुछ कहना है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: सुनो ज़रा दिल का तुमसे कुछ कहना है तुम् … more »
मुझको यूँ प्यार कैसे हो गया
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मुझको यूँ प्यार कैसे हो गया उफ़! यह दिल स … more »
पहली नज़र का पहला प्यार
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना म … more »
मेरा दीवाना दिल धड़कता है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए पल- … more »
आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: आज वह हर शख़्स मुझे बेग़ाना लगता है कल त … more »
अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा दे … more »
तेरे चेहरे ने शिकन लफ़्ज़ों में बयाँ की होगी
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: तेरे चेहरे ने शिकन लफ़्ज़ों में बयाँ की … more »
मैं खु़द को दो बाँहों में भरकर
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: तुम्हें देखता हूँ तो तुम्हारी मासूम ह … more »
साड़ी में उड़स के चाबियाँ
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: न किसी में वो रंग न किसी में वो बात जो त … more »
