सुमिरन कर के चारों बेला ! जीवन है सुख – दुःख का मेला !! हरि को काहे मनवा भूला ! हरि तो है सावान का झूला ! काहे को तू रहे अकेला !!१!! इस मेले में दर्द खिलौना ! ये मेला है इक मृगछौना ! जो सुखी है … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: सुमिरन कर के चारों बेला ! जीवन है सुख – दुःख का मेला !! हरि को काहे मनवा भूला ! हरि तो है सावा … more →