अमलतास के पुष्पित झूमर ग्रीष्म ऋतु की खनकी पायल गरम हवायें तनमन घायल तपती धरा,झुलसाती हर प्रहर शाम सुहानी या मीठी सहर ज्वाला सी धग धगती दोपहर सृष्टि पर जैसे टूटा कहर राह पर मिल जाते हो तुम लगते हो … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: अमलतास के पुष्पित झूमर ग्रीष्म ऋतु की खनकी पायल गरम हवायें तनमन घायल तपती धरा,झुलसाती हर प्रहर शाम … more →
mehhekk wrote 1 year ago: सखा पलाश संग तुम्हारे बचपन से रिश्ता है ना तुमसे मेरा और मुझसे तुम्हारा नैनिहाल के आँगन में पनपा ये … more →