तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था मुझसे दूर जाकर मुझे भुलाना ही था बदली-बदली फ़िज़ा में कुछ अपना लगा यह मौसम तो इक रोज़ आना ही था इसे क्या कहूँ, क्या प्यार का नाम दूँ तू अगर मिले मुझे तेरा हाथ थाम लूँ … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था मुझसे दूर जाकर मुझे भुलाना ही था बदली-बदली फ़िज़ा में कुछ अपना लगा … more →