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	<title>swet-marden &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/swet-marden/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "swet-marden"</description>
	<pubDate>Sat, 19 Jul 2008 05:24:12 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[स्वेट मार्डेन:रोटी के फुलाव की जरूरत ]]></title>
<link>http://rajdpk.wordpress.com/?p=96</link>
<pubDate>Sat, 23 Feb 2008 07:18:59 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://rajdpk.wordpress.com/?p=96</guid>
<description><![CDATA[एक बार किसी महिला ने अपने पति को रोटी क]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>एक बार किसी महिला ने अपने पति को रोटी के स्वादिष्ट न होने का कारण बताते हुए कहा-''इस रोटी में अच्छी रोटी के तमाम गुण मौजूद हैं तो भी इसके खाने में इसलिए स्वाद नहीं आता क्योंकि इसको पकाते समय यह फूली नहीं थी.''<br />
प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई स्वाभाविक गुण विद्यमान रहता है जिसे वह अवसर न मिलने के कारण प्रकट नहीं कर पाता. आप कल्पना करें की किसी युवक में संगीत के प्रति  ह्रदय में अंतर्मन की गहराईयों तक प्रेम है पर दूरस्थ किसी गाँव में खेती का काम करता है जहाँ उसे न तो किसी संगीत सभा में जाने का अवसर मिलता है और किसी संगीत के जानकार से उसका संपर्क हो पाता है. अचानक उसे शहन जाना पड़े और वह कहीं किसी संगीत सभा में जाता या सिनेमा में जाता तब उसके अन्दर पहले से विद्यमान संगीत प्रेम का गुण जाग उठता है. उसे हृदय में का संगीत प्रेमी नाचने लगता है, वह उल्लासित होता है और तब वही युवक एक नये रूप में प्रकट होता है. अवसर मिलते उसका लक्ष्य ही संगीत सुनना हो जाता है. </p>
<p>इसलिए हमेशा ऐसे अवसरों की तलाश में जाना चाहिए जो हमारे स्वाभाविक गुणों को उबारने में मदद कर सकें. उन अनेक युवकों पर यही बात लागू होती है जिनमें सभी गुण विद्यमान हैं. उनमें शक्ति और योग्यता दोनों ही मौजूद है. बस आवश्यकता है तो'रोटी के फुलाव की'. अत: उन्हें विचलित नहीं होना चाहिए.</p>
<p><strong>लेखकीय अभिमत-इसी तरह जिन लोगों में इतनी शक्ति है की दूसरों को अवसर दे सकें उन्हें भी यह सोचना चाहिए कि नये लोगों को जिनके पास अनुभव नहीं है उनको पहले परखें   ऐसे ही न नकारें बल्कि यह देखने का प्रयास करें  कि उस व्यक्ति के  स्वाभाविक गुण कहीं उनके अनुकूल तो नहीं हैं.<br />
 </strong></p>
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<title><![CDATA[स्वेट मार्डेन-अपने को रोगी बताकर अपना रोग बढाओगे]]></title>
<link>http://dpkraj.wordpress.com/2008/01/20/apne-ko-rogee-batakar-apna-rog-badhaaoge/</link>
<pubDate>Sun, 20 Jan 2008 07:33:23 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://dpkraj.wordpress.com/2008/01/20/apne-ko-rogee-batakar-apna-rog-badhaaoge/</guid>
<description><![CDATA[1.निरंतर सोच-विचार भी मनुष्य को क्षति प]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>1.निरंतर सोच-विचार भी मनुष्य को क्षति पहुंचाता है. अगर आप हमेशा अपने शरीर में रोग के लक्षणों पर ही उधेड़ बुन करते रहें तो आप निश्चित रूप से रोग ग्रस्त जो जायेंगे. आप वहमी कहे जाने लगेंगे.</p>
<p>2.बहुत से लोग रोग ग्रस्त होते हुए भी अपने को रोगी नहीं मानते. अत: वे जल्दी ही रोग मुक्त हो जाते हैं. उनका आत्मविश्वास उन्हें निरोगी बना देता है.</p>
<p>3.प्राय: यह देखा जाता है की लोग अपने रोग के लक्षणों और अपनी दुर्बलताओं को बढा-चढाकर बताते हैं. शायद वे समझते हैं हों की इससे उन्हें लाभ मिलेगा. मगर नहीं, इससे उनके रोग एवं क्षीणता में वृद्धि होती है. वे और ज्यादा दुर्बल हो जाते हैं. निरंतर सोच-विचार व्यक्ति को विक्षिप्त कर देता है.</p>
]]></content:encoded>
</item>
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<title><![CDATA[स्वेट मार्डेन:जीवन में विश्वास ही है यौवन में विश्वास ]]></title>
<link>http://deepakraj.wordpress.com/2008/01/19/jivan-men-vishvas-hain-yauvan-men-vishvas/</link>
<pubDate>Sat, 19 Jan 2008 04:24:00 +0000</pubDate>
<dc:creator>दीपक भारतदीप</dc:creator>
<guid>http://deepakraj.wordpress.com/2008/01/19/jivan-men-vishvas-hain-yauvan-men-vishvas/</guid>
<description><![CDATA[१.जिनका विकास रुक जाता है, जो बढ़ना बंद ]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>१.जिनका विकास रुक जाता है, जो बढ़ना बंद कर देते हैं। ठहर जाते हैं। वे जल्दी बूढे हो जाते हैं।<br />
२.नये-नये खेल सीखिए। नई-नई पत्रिकाएँ पढिये। अच्छी पुस्तकों से अधिक-अधिक से ज्ञान  बढाते रहिये। कुछ न कुछ लिखिए।<br />
३.संसार में अनेक भाषाएं हैं। नई-नई भाषाएं सीखिए<br />
४.पृथ्वी पर अरबों लोग रहते हैं। लाखों के संपर्क में आप आ सकते हैं, हजारों से अपना व्यवहार कर सकते हैं। नए-नए लोगों से परिचय कर सकते हैं। अपने संपर्क, व्यवहार और परिचय का दायरा बढाते जाएं। </p>
<p>आप ऐसा करते हैं तो आपको जीने का विश्वास होगा-आपको जीवन पर विश्वास है तो आप यौवन में विश्वास करते हैं। फिर आप चिर युवा और चिर सुन्दर हैं और रहेंगे। आप कभी भी बूढे नहीं हो सकते। </p>
]]></content:encoded>
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