जो चाहा था ना मिला, ददँ दिल मे अब तक भरा, जिदंगी बहे गइ है यारो, बहेते आँसु की तरहा, प्यार मागां ना मिला, संसार मागां ना मिला, मेरे प्यार का थोडा सा, दीदार मागां ना मिला, तकदीर से उम्मीद बांधी के आ… more →
Manish Pansiniya's Poemsविनय wrote 4 months ago: दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँ … more →
विनय wrote 6 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →
विनय wrote 8 months ago: हम सब के सच्चे दोस्त हैं हर दिल की बात समझते हैं उसकी ख़ुशी को हम अपने ख़ुशी के आँसुओं में रखते हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: अश्क से पहले आँच उठती है जब भी तुझपे आँख टिकती है बाटे हुए सब वक़्त के धागे पर उनमें अब गिरह दिखती है … more →
Manish wrote 1 year ago: जो चाहा था ना मिला, ददँ दिल मे अब तक भरा, जिदंगी बहे गइ है यारो, बहेते आँसु की तरहा, प्यार मागां ना … more →
Manish wrote 1 year ago: प्यार क्या है? जरा नीचे पढिये वो कैसा होता है, प्यार दिल का दरिया है, जिस मे डुब जाना होता है, प् … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं मर जाऊँ तो अपनी हद से गुज़र जाऊँ तो क्या तुम जी सकोगी, बोलो…! सीने जो एक दिल है इसमें तेरा … more →
Manish wrote 1 year ago: दील खाली है, आशीयाँ भी खाली सा लगे, तुम बिन मुजे ये जहाँ भी खाली सा लगे, तडप रहा हु तेरी यादो मे ओ म … more →
विनय wrote 1 year ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी यूँ भी होता है ज़िन्दगी मिलती है खो जाती है यह शाम उसकी यादों में मुझको डुबो जाती है नहीं यह मुमक … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →
Manish wrote 1 year ago: चाहा था तुमको दिल से, समजा ना तुमने दिल को, ठुकराके यु चल दिये.. अरमा थे लाखो दिल मे, सपने देखे … more →
विनय wrote 1 year ago: जितनी मै उन आँखों में थी उतनी और कहाँ जितना सुरूर उन आँखों में था उतना और कहाँ रोज़ शाम दरवाज़े पे बैठ … more →
विनय wrote 1 year ago: अंगीठी में सुलगता कोयला झलोगे तब जाकर धुँआ ज़रा कम उठेगा आँसू अपनी आँख के सब पोंछ दो शायिर: विनय प्रज … more →
विनय wrote 1 year ago: Flowers knew how to bloom I always set out myself From the crowded rooms I spent all day and night I … more →
विनय wrote 1 year ago: I love you so… Winds are payin’ pleasure And desert gets no rain Nights are payin’ … more →
विनय wrote 1 year ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलाते रहे हम दीवानों की ख़ैर भला कौन पूछे लोग आते-जाते रहे हम रखते … more →
विनय wrote 1 year ago: This is not a story, you’re my history I’m fed up what I did for you baby I wanna live for myself wi … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल की बस्तियाँ जलीं पर उठा नहीं धुँआ बुझाया आँखों से मैंने पर बुझा नहीं धुँआ बहुत देर तक टीस दबाये … more →