एक दोस्त मेरा भी हो एक यार मेरा भी हो जिसकी बाँहों में मुझे मिल जाये ज़िन्दगी जो झूठ-मूठ रूठ के सताये, करे दिल्लगी देखे हमने कई हसीं लेकिन वह मिला नहीं जो पहली नज़र में दिल में उतर जाये जो गहने उतारे गर… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: एक दोस्त मेरा भी हो एक यार मेरा भी हो जिसकी बाँहों में मुझे मिल जाये ज़िन्दगी जो झूठ-मूठ रूठ के सताये … more →