मैंने कुछ अंग्रेजी ब्लाग के पाठों को हिंदी में अनुवाद कर उन्हें पढ़ा। इसमें कुछ भारतीय लेखकों द्वारा भी लिखे गये हैं। ऐसा लगता है कि विश्व का पूरा ब्लाग जगत एक समय एक जैसा ही दिखाई देगा हालांकि उनमें … more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैंने कुछ अंग्रेजी ब्लाग के पाठों को हिंदी में अनुवाद कर उन्हें पढ़ा। इसमें कुछ भारतीय लेखकों द्वारा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: यह रहीम निज संग लै, जनमत जगत न कोय बैर, प्रीति, अभ्यास, जस, होत होत ही होय कविवर रहीम कहते हैं की पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब लगि जीवन जगत में, सुख दुख मिलन अगोट रहिमन फूटें गोट ज्यों, परत दुहुन सुर चोट कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: १.इतने भारी शरीर वाला हाथी छोटे से अंकुश सा वश में किया जाता है. सब जानते हैं की अंकुश परिमाण में हा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पहले इस नई दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण फैलना शुरू हुआ या आतंकवाद? यह प्रश्न ऐसा ही है कि पहले मुर्गी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मलेशिया में भारतवंशियों के आन्दोलन पर वहाँ की सरकार का बराबर रवैया अत्यंत चिंता का विषय है और हर समय … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: १.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के दांतों में मक्खी के मस्त … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: उस दिन मैं एक टीवी चैनल पर लाफ्टर शो में एक पाकिस्तानी कलाकार के प्रदर्शन को देखकर यह सोच रहा था कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: देश में कई लोग अभी भी टाँगे और बैलगाडी चलाते कई जगह हाथ रिक्शा भी खींचे हुए गरीब पसीना बहाते कई लोगो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: १.कोयल की मीठी वाणी उसका वास्तविक रुप है, वरना तो वह भी कॉए के समान काली और कुरूप होती है, परंतु उसक … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: चाल बकुल की चलत हैं, बहुरि कहावैं हंस ते मुक्ता कैसे चुंगे, पडे काल के फंस संत शिरोमणि कबीरदास जीं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जो रहीम करिबो हुतो, ब्रज को इहै हवाल तौ काहे कर धरुयो, गोवर्धन गोपाल कविवर रहीम कहते हैं कि श्रीकृष … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: हर कहानी रोज दोहराई जा रही है फिर भी लोग हैं कि भूल जाते हैं। अपने लोगों में ही दुश्मन छिपे हैं और द … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते है … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: सास ने बहू से कहा ‘तुम्हें आज मायके जाने की अनुमति पर शाम ढलने से पहले घर लौट आना तेरे ससुर और … more →