तेरी आँखों से ही जागे सोये हम कब तक आखिर तेरे ग़म को रोये हम वक्त का मरहम ज़ख़्मों को भर देता है , शीशे को भी ये पत्थर कर देता है । रात में तुझको पाऐं , दिन में खोये हम । हर आहट पर लगता है तू आया हैं … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: तेरी आँखों से ही जागे सोये हम कब तक आखिर तेरे ग़म को रोये हम वक्त का मरहम ज़ख़्मों को भर देता है , श … more →