जिन्दगी तुझको जिया है कोई अफ़सोस नहीं, ज़हर ख़ुद मैंने पिया है कोई अफ़सोस नहीं, मैंने मुजरिम को भी मुजरिम न कहा दुनिया में, बस यही जुर्म किया है कोई अफ़सोस नहीं, मेरी किस्मत में जो लिखे थे उन्ही काँटो… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: जिन्दगी तुझको जिया है कोई अफ़सोस नहीं, ज़हर ख़ुद मैंने पिया है कोई अफ़सोस नहीं, मैंने मुजरिम को भी म … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: शायद मैं जिन्दगी की सहर ले के आ गया, कातिल को आज अपने ही घर ले के आ गया, ता उम्र धुंद्ता रहा मंज़िल म … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ढल गया आफताब ऐ साकी, ला पिला दे शराब ऐ साकी, या सुराही लगा मेरे मुँह से, या उलट दे नकाब ऐ साकी, मैकद … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: जिस मोड़ पर किए थे हम इन्तेजार बरसों, उससे लिपट के रोये दीवाना-वार बरसों, तुम गुलसितां से आए ज़िक्र ख … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी शबाब की नक़ाब गुम बड़ी हसीन रात थी। मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद … more →