एक ना एक शम्मा अन्धेरे में जलाये रखिये सुब्ह होने को है माहौल बनाये रखिये (शम्मा : lamp, candle-light; सुब्ह : morning; माहौल : environment) जिन के हाथों से हमें ज़ख्म-ए-निहाँ पहुँचे हैं वो भी कहते है… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 3 years ago: एक ना एक शम्मा अन्धेरे में जलाये रखिये सुब्ह होने को है माहौल बनाये रखिये (शम्मा : lamp, candle-ligh … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: रात भी, नींद भी, कहानी भी हाए! क्या चीज़ है जवानी भी दिल को शोलों से करती है सैलाब ज़िन्दगी आग भी है … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता (रुख़ : face; नक़ाब … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले मैं ने देखे हैं कई रंग बदलने वाले तुमने चुप रहकर सितम और भी ढा … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी मुझको अहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी (रंजिश : animos … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: ग़म बढे आते हैं क़ातिल की निगाहों की तरह तुम छिपा लो मुझे, ऐ दोस्त, गुनाहों की तरह (ग़म : sorrows; क … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे ये भी पूछेंगे कि तुम इतनी परेशां क्य … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: आए हैं समझाने लोग हैं कितने दीवाने लोग दैर-ओ-हरम में चैन जो मिलता क्यूं जाते मैखाने लोग (दैर-ओ-हरम : … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: दर्द बढ कर फुगाँ ना हो जाये ये ज़मीं आसमाँ ना हो जाये (फुगाँ : lamentation; ज़मीं : earth; आसमाँ : s … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं तुझे ऐ ज़िन्दगी हम दूर से पहचान लेते हैं तबीयत अपनी घबरात … more →