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भ्रष्ट पात्र किसी कहानी में में केन्द्रीय पात्र क्यों नहीं होता -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: स्वतंत्रता के बाद देश का बौद्धिक वर्ग दो भागों में बंट गया हैं। एक तो वह जो प्रगतिशील है दूसरा वह जो … more →

Tags: Blogroll, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar, hindi jagran, hindi litreture

अंतर्जाल पर विधा नहीं बल्कि कथ्य महत्वपूर्ण है-विशेष संपादकीय3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज यह दूसरा ब्लाग/पत्रिका है जिसने 30 हजार पाठ/पाठक संख्या को पार किया। इससे पहले हिंदी पत्रिका ने इ … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, सूचना, अनुभूति, आलेख

विदुर नीतिःक्षमाशील क्रोध रोककर अभद्रता करने वाले को नष्ट कर डालता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.दूसरों के अभद्र शब्द सुनकर भी स्वयं उन्हें न कहे। क्षमा करने वाला अगर अपने क्रोध को रोककर भी बदतमी … more →

Tags: Hindi writing, web duniya, hindi megzine, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep, हिंदी पत्रिका

श्रीमद्भगवद्गीता - ९

Nikhilashish wrote 1 year ago: अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते | तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि || यह आत्मा अव्यक्त … more →

Tags: नीति वचन, Arjun, Gita, Krishna, Life, Wisdom

चाणक्य नीति - विवाह

Nikhilashish wrote 1 year ago: वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम् | रूपशीलां न नीचस्य विवाहः सदृशे कुले || बुद्धिमान व्यक्ति … more →

Tags: नीति वचन, Chanakya, Diplomacy, Kautilya, Wisdom

श्रीमद्भगवद्गीता - ८

Nikhilashish wrote 1 year ago: अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च | नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः || यह आत्मा अच्छेद्य … more →

Tags: नीति वचन, Arjun, Gita, Krishna, Life, Wisdom

चाणक्य नीति - निश्चित अनिश्चित

Nikhilashish wrote 1 year ago: यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते | ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति अध्रुवं नष्टमेव च || जो अपने निश्चित … more →

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श्रीमद्भगवद्गीता - ७

Nikhilashish wrote 1 year ago: नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः | न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः || इस आत्मा को शास् … more →

Tags: नीति वचन, Arjun, Gita, Krishna, Life, Wisdom

चाणक्य नीति - सच्चा बन्धु

Nikhilashish wrote 1 year ago: आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रुसंकटे | राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः || बीमारी में … more →

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श्रीमद्भगवद्गीता - ६

Nikhilashish wrote 1 year ago: वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि | तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि … more →

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चाणक्य नीति - परीक्षा2 comments

Nikhilashish wrote 1 year ago: जानीयात् प्रेषणे भृत्यान् बान्धवान् व्यसनाऽऽगमे | मित्रं चाऽऽपत्तिकालेषु भार्यां च विभवक्षये || नौकर … more →

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चाणक्य नीति - कहाँ नहीं रहें

Nikhilashish wrote 1 year ago: यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः | न च विद्याऽऽगमः कश्चित् तं देशं परिवर्जयेत् || जिस द … more →

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चाणक्य नीति - धन, स्त्री व स्वयं की रक्षा

Nikhilashish wrote 1 year ago: आपदर्थे धनं रक्षेद् दारान् रक्षेद् धनैरपि | आत्मानम् सततं रक्षेद् दारैरपि धनैरपि || विपत्ति के समय क … more →

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चाणक्य नीति - निश्चित मृत्यु

Nikhilashish wrote 1 year ago: दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्युश्चोत्तरदायकः | ससर्पे च गृहे वासो मृत्युरेव न संशयः || दुष्ट स्त्री, … more →

Tags: नीति वचन, Wisdom, Chanakya, Diplomacy, Kautilya

चाणक्य नीति - दुःखी बुद्धिमान

Nikhilashish wrote 1 year ago: मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टस्त्रीभरणेन च | दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति || मूर्ख छात्रों को पढ … more →

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श्रीमद्भगवद्गीता - ५

Nikhilashish wrote 1 year ago: वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् | कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम् || हे पृथापुत्र अर्जुन! ज … more →

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श्रीमद्भगवद्गीता - ४

Nikhilashish wrote 1 year ago: न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः | अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमा … more →

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श्रीमद्भगवद्गीता - ३

Nikhilashish wrote 1 year ago: य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् | उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते || जो इस आत्मा को म … more →

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श्रीमद्भगवद्गीता - २

Nikhilashish wrote 1 year ago: अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे | गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः || हे अर्जुन! तू न … more →

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