ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने को जी करता है खो गया हूँ तन्हाइयों में कहीं न कोई शाद है न दर्द है कहीं बिछायी-बिछायी काँटों की तह है… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने क … more →
विनय wrote 1 year ago: जब कभी वह शाम मुझे याद आयी मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी माना आज शाम का वह रंग नहीं और मेरी जान त … more →