जिगर को चाक करना चाहता हूँ साँसों में दर्द भरना चाहता हूँ गीली आँखों में सच्चे अफ़साने ऐसे जीवन से डरना चाहता हूँ नस-नस में डुबो रखा है उसे जिसके दिल में रहना चाहता हूँ कोई ‘नज़र’ को मुख़ाति… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जिगर को चाक करना चाहता हूँ साँसों में दर्द भरना चाहता हूँ गीली आँखों में सच्चे अफ़साने ऐसे जीवन से डर … more →