मक़सद है मेरे पास क्या जीने को कहाँ से लाऊँ तुम-सा बहाना जीने को साँस चलती है ज़ख़्म करते हुए कौन कब तक करेगा दवा जीने को तस्वीरे-सुखन आँखों में अयाँ है सुखनवर को देते हो दुआ जीने को रखे हैं सभी दाग़ जो … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मक़सद है मेरे पास क्या जीने को कहाँ से लाऊँ तुम-सा बहाना जीने को साँस चलती है ज़ख़्म करते हुए कौन कब त … more →