ठंड न जाए, बादल भी छाए , हवा हि सताए, तो क्या बसंत है? पतझड़ बहारें, सूखी हैं डालें, पंछी न गावें, तो क्या बसंत है? मौसम भ्रमाया, मन डरपाया, कैसी यह माया, कैसा बसंत है? खिलते थे फूल, उड़ती थी … more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: ठंड न जाए, बादल भी छाए , हवा हि सताए, तो क्या बसंत है? पतझड़ बहारें, सूखी हैं डालें, पंछी न … more →