क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता क्यों? मुझे बेक़रारियों से क़रार नहीं मि… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 2 months ago: क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: वह मुझे चाहती है या यूँ ही मुझसे बात कर … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: तुम्हें महसूस हो कि ना हो मेरे सीने मे … more →