विनय wrote 1 year ago: क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता क्यों? मुझे बेक़रारियों से क़रार नहीं मिलता क्यों? ढल रहा हूँ दि … more →
विनय wrote 1 year ago: हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है हर लम्हा ज़िन्दगी … more →
विनय wrote 2 years ago: वह मुझे चाहती है या यूँ ही मुझसे बात करनी थी उसे कोशिश तो उसने मुझ तक पहुँचने की बहुत की थी और फिर व … more →
विनय wrote 2 years ago: तुम्हें महसूस हो कि ना हो मेरे सीने में दर्द है तो सही… लम्हा-लम्हा जज़्बात पिघलते हैं ग़म की चि … more →