तू एक बार देख ले पीछे मुड़के हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले ऐसा यह क्या हो गया अन्जाने दिल मेरा क्यों टूट गया रब जाने तुम गये तन्हा हो गयी ज़िन्दगी तुम गये दिल से गयी हर ख़ुशी हर लम्हा तू मुझे याद आ रही… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: तू एक बार देख ले पीछे मुड़के हम हैं वहीं जहाँ थे कभी अकेले ऐसा यह क्या हो गया अन्जाने दिल मेरा क्यों … more →