है ना बहुत गहरा अंधेरा है, तेरे आसपास का कुछ भी दिखाई नही दे रहा झुंझलाहट,क़ैद का आभास अंधेरों में गुम होती आवाज़े कोई रोशनदान भी नही अगर तुम महसूस करोगे सब की हालत तेरे जैसी है कोई मद्दत के लिए नही आ… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: है ना बहुत गहरा अंधेरा है, तेरे आसपास का कुछ भी दिखाई नही दे रहा झुंझलाहट,क़ैद का आभास अंधेरों में ग … more →
lalloo wrote 1 year ago: हीरानन्द सच्चिदानन्द वात्सायन अज्ञेय की पत्रकारिता को को आप दिनमान से जानते हैं. लेकिन क्या आप बता स … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नन्हे से दीपक में सजाई बाती रौशनी चारों तरफ,निखरी हुई ज्योति हर पल तप तप कर तुम हो जाना प्रखर दीप तु … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ज़िंदगी में जब होता नही है मनचाहा लगता जैसे दिल ने,सारा दर्द है सहा खुली आँखों से भी नज़र आता है … more →