मुझे गुसा दिखाया जा रहा है, तबस्सुम को दबाया जा रहा है, वहाँ तक आबरू जब्त-ऐ-गम है, जहाँ तक मुस्कुराया जा रहा है, दो आलम मैंने छोडे जिसके खातिर, वही दामन छुडाया जा रहा है, क़रीब आने में है उनको तकल्लुफ… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: मुझे गुसा दिखाया जा रहा है, तबस्सुम को दबाया जा रहा है, वहाँ तक आबरू जब्त-ऐ-गम है, जहाँ तक मुस्कुराय … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मेरे क़रीब न आओ के मैं शराबी हूँ, मेरा शवों जगाओ के मैं शराबी हूँ, ज़माने भर के निगाहों से गिर चुका … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा, आग से आग बुझा फूल खिला जाम उठा, ऐ मेरे यार तुझे उसकी कसम देता हूँ, … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा, मेरा दरवाजा हवाओं ने हिलाया होगा, दिल-ऐ-नादान न धड़क ऐ दिल-ऐ-नादान न ध … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: बस एक वक्त का खंजर मेरी तलाश में है, जो रोज भेष बदल कर मेरी तलाश में है, मैं एक कतरा हूँ मेरा अलग वज … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: आप से गिला आप की क़सम सोचते रहें कर न सके हम उस की क्या ख़ता लदवा है गम़ क्यूं गिला करें चारागर से ह … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता हैं तेरे आगे चांद पुराना लगता हैं तिरछे तिरछे तीर नजर के चलते हैं सीधा … more →