अपना अपना रास्ता है कुछ नही, क्या भला है क्या बुरा है कुछ नही, जुस्तजू है एक मुसलसल जुस्तजू, क्या कही कुछ खो गया है कुछ नही, मोहर मेरे नाम की हर शय पे है, मेरे घर मे मेरा क्या है कुछ नही, कहने वाले अप… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: अपना अपना रास्ता है कुछ नही, क्या भला है क्या बुरा है कुछ नही, जुस्तजू है एक मुसलसल जुस्तजू, क्या कह … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: बहुत खूबसूरत है, आँखे तुम्हारी, अगर हो इनयात, ऐ जाने मोहब्बत, गारा देगी ये दिल को, किस्मत हमारी, जो … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: यूं तो गुज़र रहा है, हर इक पल खुशी के साथ, फिर भी कोई कमी सी है, क्यों ज़िंदगी के साथ, रिश्ते वफाये द … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: रात खामोश है चाँद मदहोश है, थाम लेना मुझे जा रहा होश है, मिलन की दास्ताँ धडकनों की जुबान, गा रही है … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: यह किसका तस्सवूर है, यह किसका फ़साना है, जो अश्क है आखों में तस्बीह का दाना है, जो उन पे गुज़रती है, … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: गुम सुम ये जहाँ है, हमदम तू कहाँ है, गम्ज़दा हो गई, ज़िंदगी आ भी जा, रात बैठी है बाहे पसारे, सिस्किया … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: हर एक घर में दीया भी जले अनाज भी हो, अगर न हो कही ऐसा तो एहतराज़ भी हो, हुकुमतो को बदलना तो कुछ मुहा … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: फिर नज़र से पिला दीजिये, होश मेरे उड़ा दीजिये, छोडिये बर्ह्मी की रविश, अब जरा मुस्कुरा दीजिये, बात अफ … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तेरा चेहरा है आईने जैसा, क्यो न देखू है देखने जैसा, तुम कहो तो मैं पूछ लू तुमसे, है सवाल एक पूछने जै … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: काँटों से दामन उल्झाना मेरी आदत है, दिल मे पराया दर्द बसना मेरी आदत है, मेरा गला अगर कट जाए तो मुझ प … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: घर से निकले थे हौसला करके, लौट आए खुदा खुदा करके, हमने देखा है तज्रुबा करके, जिन्दगी तो कभी नही आए, … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मुस्कुरा कर मिला करो हमसे, कुछ कहा और सुना करो हमसे, बात करने से बात बढती है, रोज बाते किया करो हमसे … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तेरी आँखों से ही जागे सोये हम कब तक आखिर तेरे ग़म को रोये हम वक्त का मरहम ज़ख़्मों को भर देता है , श … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नही जाता, जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नही जाता, सब कुछ तो है क्या ढूंढती … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: रुख़ से परदा उठा दे ज़रा साक़िया बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जायेगा है जो बेहोश वो होश में आयेगा गिरनेवाला ज … more →