मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा जिस बाज़ार में ग़म बिकते … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सह … more →
Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, बाज़ार, शाम
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